सफ़र सदा सुहाना हैं,
तुम्हारे संग प्रेम का जश्न रोज़ाना हैं,
मोहलत संग गुफ्तुगु हुए बीता ज़माना हैं,
मंशा थोड़ी ना किसी को लुभाना हैं,
हर विजय में सूत्र वही सरलता का पुराना हैं,
स्वागत करने का नए अवसर को भी बहाना हैं!
अराजकता में क्या बाकी अकथित अफसाना हैं?
शेष जितने दिन बाकी उसमें फिर कर्तव्य निभाना हैं,
मोहलत की घड़ी हुई आरंभ,
हर किस्सा नए सलीके से प्रारंभ,
जुमला लिए फिर कोई राही बात बनाता हैं,
ख्वाबों से दूर कहीं कोई अपनेपन कि खोज में रवाना हैं,
मगर मेरा दिल तो सिर्फ आज को जीने में दीवाना हैं,
कहो तुम्हें मेरे साथ साहित्य को रचने का लबों पर बहाना हैं?
उम्मीद से उत्पन्न आदर फिर समाज को भी तो कामना हैं!
बात करते वक़्त आयीने में खुद से नज़रे नहीं चुराना हैं,
वक़्त हो तो ममता के मंजूल में खुदको सराहना हैं,
सफर सदा सुहाना हैं।। ✨
- यति


