कभी दिल को बहलाती,

कभी सत्य को सुंदरता से बुन लोरी सुनाती,

कभी मैं तुम्हें कल्पना में सहलाती,

कहो इतनी उत्कृष्ट कैसे रिश्ते की कली हमारी?

जड़ों में पड़ी हैं शायद उम्मीद की खाद,

तभी तो दिल हैं तुम्हारी ख़ुशी में आबाद,

तुम्हारे भविष्य के लिए धन संचित करना,

तुम्हारे हक के लिए आवाज़ उठाने में किसी से ना डरना,

थोड़ा थोड़ा कर मेहनत करना,

अपनी चुनौतियों से निपटने की ताकत रखना!

मिश्री सा मीठा हैं मुश्किल का तेवर भी तीखा,

ये तुम्हारी परवरिश से ही सीखा,

की कैसे सोच को रखना स्वतंत्र,

तुम्हारी प्रगति में सहजता तुम्हारा मूल मंत्र,

चुस्त रखो तुम शरीर रूपी यंत्र,

मिटेगा समस्त अन्तर्द्वन्द,

बसती हो तुम सबके हृदय में,

नटखट सी अदाओं के सिलसिले से,

मुझे मिले इससे सच्ची ख़ुशी,

रौशनी दमके मुख पर जैसे शशी,

तुम्हारी अबोधिता से मन का हर कोना महका,

अब प्रेम से परिपूर्ण हैं हृदय का हाल सबका,

तन की बड़े चाहे मेरे आयु,

मन में आनंद से घुली चलती हैं फिर भी वायु,

परवरिश जगाती चेतना,

और अब थोड़ी सताती कोई वेदना,

प्रेम से बनें हर स्त्री परिपक्व,

निभा सकें अपना कोमल कर्तव्य।


- यति



Dedicated to every Mom and Daughter bond ! ❤️