ऐसी शीत मालूम होती हवा,

कुछ विशेष लोग थे अरसा पहले मुझसे खफा,

आज पूछते मेरे बारे में,

आगाह करता मैं स्तिथि के बारे में,

चिंताजनक कैसे छोडूं उन्हें किसके सहारे से?

अपनाने से उन्हें लगा मिली आज़ादी अकेले कराहने से,

तबियत कुछ नर्म हैं मेरी,

यादें भी सारी चरम पर हैं मेरी,

किसने कब साथ छोड़ा?

किसने बिन बात मुझसे मुंह मोड़ा,

आखिर क्षमा कर होने दूं क्यों ना रूह को पाक,

रक्षित कर लूं उन रिश्तों को जो होने को हैं ईर्ष्या की आग से खाक,

मौत का कोई दिन नहीं होता,

उन रातों में भी आता हैं चांद जब मैं नहीं सोता,

बस जिंदगी से कभी खिन्न नहीं हैं होना,

अपनों को न आए कभी मेरी याद में रोना,

चांदनी सा चमके सबका मुख सलोना,

भूल जाएं सब अनहोनी का कहर लाया था कोरोना।


- यति


You are a fighter! ❤️


Dedicated to all the Warriors .


Don't let corona steal the power of your zeal!


Get well soon.