मानसून की कल्पना,

घने काले बादल,

तेज़ चलती हवाएं,

फिज़ाओं से बेहकी,

प्रत्येक प्रेक्षक की निगाहें,

छोटी बस्तियों के,

विस्थापित परिवारों में

अत्यधिक दूरंदेशी,

कृषि प्रणाली में

स्थिरता तथा तब्दीली,

बढ़ सके विपरीत

जलवायु में प्रयल की शक्ति,

वर्षा की बूंदें तथा

सूर्य की किरणें,

बच्चो के उत्साह से

मन भी देखो उछले,

इन्द्रधनुष के आगमन से

सबके मुख आनंद से उजले,

कुछ की टोली

कीचड़ में फुटबाल

की प्रतिस्पर्धा को निकली,

कुछ तो घर पर ही खेलने वाले

कंचा और गोटी,

प्यास भी हरियाली की

बुझनी हैं,

कुछ बौछारें उमड़ी हैं,

गुलों के रंगों में

नई ताज़गी,

परोक्ष हुई उमस,

मिला सबको निर्वात सरस,

प्रेमियों में रूमानी

भाव चरम,

कोई गली अब ना सून,

फिर भी मानसून में कुछ तो हैं सुकून!


- यति