महसूस होता हैं?
थकान के बाद
घर लौटने पर अपनों का इंतजार?
वो बस कंडक्टर जो चारों पहर ढूंढता इत्मीनान?
वो पैसा मांगने आया कोई शख़्स,
भूखा बूझदिल चेहरा?
दर्द का उसके ज़हन से हटता ही नहीं पेहरा!
महसूस होता हैं?
वो कश्मकश में यौवन?
वो डूबता सूरज,
जो नई निशा लाएगा,
एक रात फिर किसी को नींद न आना जगाएगा!
प्यार की बात का नक़ाब फिर उतर जाएगा,
जो सच्चा हैं वो ही टिक पाएगा,
जो मिलना चाहता परिवार से
दूर मज़बूर खड़ा,
महसूस होता हैं?
वो दर्द का कोहरा ,
उजाले के सामने चुनौती लेकर अड़ा,
गम में बिमार व्यक्ति,
न बांट पा रहा भावों की उमड़ी कलह,
भाषा तो सरल यहां,
यकीन करें कोई अब ऐसा सितम कहां?
महसूस होता हैं?
रोज़ का भाड़ा देते देते वो मज़दूर थका,
उसकी घरवाली भी रोज़ बच्चो को सिखाती हर दफा!
हिम्मत का पुल बंधाती हैं,
घबराई हैं पर बेचारी नहीं!
मेहनत को न समझे कोई बेकारी,
फुर्सत में फिक्र के ओ पुजारी,
महसूस होता हैं?
क्या तरकीब हैं कोई तुम्हारे पास?
जो सच में बदलती हो समाज की सूरत,
मूक न होती हो जैसे कोई मूरत,
वैसे तूफानी बदलाव का न ढूंढो तुम मूहर्त।
महसूस होता हैं?
- यति


