लेखन की अभिव्यक्ति,

आभाव में भी न लगती सख्ती,

ख़ास भी प्रतीत होता आम,

अनूठी बनती हर रूहानी शाम,

हर महफ़िल को रोचक बनाता लेखक बीच आवाम,

नहीं लगता मानो जज्बातों पर विराम!

ख़ामोश खत।


सतह से उभरे उस प्रकाश का उन्माव,

भीतर नहीं महसूस होता कोई घाव,

लिखते - लिखते मिलता इन्द्रियों को चाव,

निरूपण में स्पष्टता का भाव,

नहीं मानो मनुष्य में कम प्रतिभा का प्रभाव,

यूंही चलता रहे ये अनोखा बहाव!

ख़ामोश खत।


.....ख़ैरियत आफ़ियत की प्रार्थना स्वरूप इक लुभावनी लत!✨


- यति



❤️