काव्य की मिठास!

दिल कभी खुश तो कभी ज़रा उदास,

व्यक्तित्व नहीं किसी बंदिश का मोहताज,

सुनहरा रखें अगर हम अपना आज,

न ऊर्जा हो खर्च किसी भी अशिष्ट कामकाज,

मुश्किल में भी काव्य का भव्य वरदान,

मनुष्यता में संतोष संग समाहित करें संपूर्ण सम्मान,

मन की अभिलाषा तुम समय संग जान,

करोगे ख़ुद- ब- ख़ुद आनंद का गुणगान,

मंथन में होगा फिर चैतन्य का ज्ञान,

सौंदर्य से सुशोभित हो प्रकृति स्वत: बढ़ाएगी अपना मान,

अब जब रहस्य सरलता का गए तुम जान,

क्या अब भी बाकी तुम में कोई अभिमान?


- यति