मरहम झलके ये गुलाबी होते रुखसार,

वक़्त भी ठहरा बातों का हुआ जो विस्तार,

अनुभवों को पिरोते आकांक्षा को संवारे ये अनोखे विचार,

कल की खबर पढ़ी मैंने लिया जान सब समाचार,

तुम्हारा अपनों के प्रति महसूस किया व्यवहार,

हृदय तो स्पर्श करें वो पल जो लिए हैं साथ गुज़ार,

ख्वाहिशें सारी पूरी लगती मस्तिष्क में भी आया करार,

बार बार सत्य को जान हृदय प्रकट करता आभार,

पन्नों पर जज़्बातों की खिली अद्भुत बहार,

गोधूलि बेला में रंग बिरंगा आकाश,

मन से प्रतिबिंबित होता प्रकाश,

सदा महकता मोहक ये प्रेम का लेख लेता आकर,

हां प्रेम एक युक्ति हैं!

भ्रमों से सारे मुक्ति हैं,

स्वप्न नयन को सुलाते नहीं!

पन्ने तो पुस्तक के खाली हैं,

लेखक उम्दा अल्फाजों का माली हैं,

स्याही प्रतिबंधित नहीं हैं,

बगावत को बढ़ावा दे ये वो बागवानी नहीं हैं,

अनोखी ये सत्य की पराजय की प्रेम कहानी हैं,

हृदय से संपूर्ण जग को जो बतलानी हैं।।

- यति