मैकश है तेरे साथ की कुर्बत,

हसीन है उन लम्हों की उल्फत।

कद्रदान है तेरे प्रेममय अल्फाज़ों के,

ना जाने फिर कब हो वही आगाज़!


जो मिलो तो प्रेम की सोहबत में मिलना,

सदाकत का सुकून सारे भ्रम तोड़ देगा।

आओ तो फिर ऐसे करवट लेकर आंखो में तकना,

मानो आंखें तुम्हारी हमसे कभी जैसे जुदा ही न थी।


❤️



- यति