हंसमुख सा चेहरा,

कानो में फुसफुसाती उसकी नन्ही किलकारी,

इतनी मासूम मानो सावन की पहली सी ओस,

मत पूछो दिल की जादूगरी है वो दोस्त!


पल पल ऐसे गीत सुनाए,

मानो हर दम ही गुनगुनाए।

आंखो से ही कभी-कभी तो सबकुछ कह जाए,

भोली है ! समझे ना कि कभी मुझसे ना झूठ बोली पाए।


प्यार की पाठशाला में तो ये हमेशा ही अव्वल आए,

कभी रोके तो कभी बिना रोके ही ठहाके लगाए।

जादू जो समाया भीतर इसके ,

सबको ये अपने हुनर का आभास भी कराए।


और कोई नहीं ,

तुम्हारे भीतर की अपनी आवाज़ ही वो कहलाए!



- यति



धन्यवाद :)