हमेशा रहोगे मुझसे तुम छोटे,

लगालो चाहे कितने भी ख्वाबों में गोते,

कल रात तुम से न बन रहा था सोते,

जानती पापा की दांट से तुम थोड़े सेहमे,

मम्मी की याद तुम्हें सताती हैं,

फिर यही बतलाती हैं,

मम्मी का प्रेम हमेशा संग मौज़ूद,

की इच्छाशक्ति तुम्हारी बेहद मज़बूत,

दुरुस्त होकर तुम्हारे इरादे हुए और बुलंद,

न ले सकेगी डर की ताकत उसके समक्ष आकार,

तुम्हारे भीतर शक्ति जो निर्विकार,

जब तक तुम ना आने दोगे दिमाग में ना ना विकार,

तुम्हें प्रज्वलित करेगी उसकी हुंकार,

आनंद हमेशा लुटाते रहो,

गम में भी खुदको मनाते चलो,

हमेशा बढ़ना हैं आगे,

न कमज़ोर होते रूह के शरीर छोड़ने से रिश्तों के धागे।


- यति