प्रतिभा की श्रम को पुकार,

खुशियों की निरंतर फुहार,

आपसे केवल एक ही गुहार!

जीवन में वर्तमान में रहने से ही बहार,

लाखों की आपकी मोतियों सी मुस्कान,

बातें जो ना सुहाए निकालो उनको दूसरे कान,

मस्ती भी हौले से लेती चुनौती पहचान,

गुदगुदाती हैं मुझे भी भीतर से मेरी नन्ही जान,

हंसमुख से चेहरे पर फिर शिकन आपके कैसा?

मुखड़ा तो आपका सलोना चांद के जैसा!

मुश्किल में आपको मिले आराम कुछ ऐसा,

पतझड़ में मानो वृक्ष चिनार हो जैसा,

बीती बातें जाएं संजीदगी से बिखर,

नवीन लम्हों को मिल जाएं शिखर,

पसमंजर का ख़त आया इस दोपहर,

शांत हुई जिज्ञासा जो थी जागी आज की सहर।


- यति