थोड़ी आसमानी सी खुमारी!
नीली-नीली बूंद का पवित्र सा पानी,
रंगों की भाषा समझे तुम यानी!
फ़ीरोज़ी के साथ जंचता हुआ रानी,
तस्वीर वो लगती मुझे आज भी सुहानी,
कितनी हसीन थी उन दोनों की कहानी!
थोड़ी आफत में हिस्सेदारी,
तजुर्बे से बढ़ती समझदारी,
फ़िराक़ में मेरे हक के वो दोनों प्राणी,
गूंजती कानों में उन दोनों की वाणी!
करुणा का सिखलाते थे मुझको पाठ,
प्रकृति का सम्मान सदैव हो ऐसी बांधी गांठ,
चाहे हो जीवन का कोई भी पड़ाव,
चुनौती देता हो किसी भी प्रकार का अभाव!
ना मैं अपने मन के प्रकाश पर पड़ने दूं दबाव,
चुनूं वो जो हर्ष का सहर्ष मन में लाए बहाव!
रोज़ थोड़ी यादों से संजोती उन दोनों का प्रेम,
विरक्त रह निहारती फ़ीरोज़ी - रानी पोशाक वाला फ्रेम।
- यती
Dedicated to Mummy Papa! :) ❤️


