मां की याद सताए तुम्हें?
अविरल उत्सुकता जगाए तुम्हें ?
तो मुस्कुराती सहेली को तकना,
एक वादा जो किया उसे आहिस्ता से ढ़कना,
ढ़के वादे पर रूह की सयानी सी कारीगरी,
कारीगरी में लिपटी मुस्कानों की जादूगरी,
ये दौलत ही तो तुम्हें सदा आबाद रखना!
फ़लसफ़ा जीवन का चले जैसे हवा,
लगता हर गम की यहीं मिलती सब्र से दवा,
हां! सहेली की जीत के सिवा,
मनोकामना रखें कैसे कोई भला?
जीत उनकी निराली हैं,
रंगीन सोच से उनकी लोगों के जीवन में हरियाली हैं,
प्रकृति सांझा करती उनसे अपने अंदाज,
बदलाव सुखद सा आया हमारे भी बेहतर हुए मिजाज़,
साथ कतार में कुछ कोरे कागज़ लाएंगे फिर नया आगाज़।
- यति


