हम हकीकत से न हुए कभी जुदा,
पर आप मान जाइए हम दिल शुदा,
मिलने को परस्पर बांधे सपने,
कुछ खास एहसास लगे मुझे अपने,
रौशन सा मन का हर कोना,
अब मिल कर उन्हें नहीं मुझे खोना,
छोड़ दिया दिल का था जो रोना,
अब फिर बाहम हम करेंगे मन का गोना,
ज़िद का खत्म हुआ स्वरूप सलोना,
जानते संग तन नहीं कोई खिलौना,
विवेक संग विकसित आभामंडल खरा सोना,
शख्सियत मानो सूर्य समक्ष चन्द्र का नमन होना।
- यति
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