दर्खास्त
सपने वही नायाब जिनमें हो नएपन की आशंका का आभास,
जो प्रेरित करे अपनों को भी,
रौशन करे मन के दर्पण को भी।
हम जी ही तो रहे ना वो बेशकीमती सपना,
जिसकी रही थी हमें ख्वाहिश सदा से।
तो आज फिर सपनों कि बात चली तो...
मन को फिर से हमने वही याद दिलाया,
अरे ! तुझे यही तो चाहिए था,
जो आज में मौजूद है,
वही तो है तेरी मंज़िल जिसमें हर रंग का मेल है,
जश्न्न है,जुनून है और बेइंतहां सा सुकून है।
वो राग है जो रूमानी है,
वो साज़ है जो अतीत से बेइमानी है।
~यति
:)


