दर्द's image


आए थे तुम खामोशी लेकर,

बातें मेरी सुनकर मुस्कुराते थे तुम!

सांवली सी सूरत,

सादी सी मुस्कान,

प्रिय लगा तुम्हारा सहायक अंदाज़,

परिचय लिया तुमने मुझे अपना परिवार बनाकर,

माना मैंने सेवा तुम्हें सर्वोपरि,

देख तुम्हारी नादानी ,

हुई चेष्टा , लगा खेलेंगे लंबी पारी,

भावभंगिमा से लगा तुम ना जज़्बातो के व्यापारी,

तुम तो सटीक लगे थे,

कफ़स को लगा तोड़ दोगे,

कसर सारी छोड़ दोगे,

सफर को शायद कोई नया मोड़ दोगे,

भागती हुई दुनिया में,

रुककर थोड़ा सरलता पर ज़ोर दोगे,

कठिनाई में साथ से संबल दोगे ,

बीती हुई दास्तां से शायद कुछ सबक लोगे,

मुझे चाहने की सच्ची बात

लगा मुझे उस पर अमल करोगे,


मौसम कितना सुहाना था,

हर बात पर मेरे लबों पर

नए गीत का बहाना था,

गुनगुनाते थे तुम थोड़ा कम

आवाज़ तो अच्छी थी,

पर शरारती थे तुम

ज़िद्दी होकर भी कैसे भा जाते थे तुम?

किसी फिल्म सी तो कहानी चल रही थी,

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