ज़रूरी नहीं वक़्त के संग ये जुस्तजू ,

किसी मुकाम तक ही पहुंचे,


वक़्त तो है ही यूं सपनों के सफर का,

कहीं किसी हमसफ़र पर दिल हार,

हसीन सी मदहोशी का।


किन्तु आपने ही तो दिया था ज़माने को सबक,

रह बेबाक और जीता रह उसूलों को अपने बेखबर।


यहां जज़्बात सही या ग़लत नहीं,

नाही दो व्यक्तियों का एक दूजे के लिए चयन...


बात तो शायद सब्र की है ।


- यति