नन्ही चिड़िया चहकी,
गुलशन से सुंगध महकी,
आंखों से नमी छलकी,
मीठी नींद की लगी झपकी,
थोड़ी फिज़ा में रूहानियत बहकी,
तभी हौले से हवा का झोंका आया,
घनी ज़ुल्फो को क्या खूब लहराया,
अनोखे सपने को ज़ुबान पर लाया,
विकट हुई परिस्थिति तो सपनों ने फिर जगाया,
देखो वसंत का मौसम आया!
ना गर्म हैं तेवर मौसम का,
ना सर्द हैं हवाएं,
हरित पोशाक कुदरत धरती को पहनाएं,
नई उमीदें फिर दिल में जगाएं,
नर्म हैं फूलों का अंदाज़ आंगन में,
नन्ही चिड़िया का परिवार देखो नील गगन में,
खिलते सूरज का सवेरा,
सुकून में सृष्टि का बसेरा,
मनुष्य की सुधारने में छवि,
अब बावला सा मेरा मन कवि,
जोड़ें ऐसे शब्द,
जो करें ना स्तब्ध,
क्यूंकि आशंका तो बदलाव की हैं,
मनुष्य ने ऐसे ही तो निरपेक्ष होने की बात की हैं।
- यति
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:)
"Spring is nature's way of saying, 'Let's Party!"
❤️


