बेइंतहा सा विश्वास,
कितनी कोमल सी आस,
मन में न फंसी कोई फांस,
लगते मुझे वो बहुत ही खास,
अब कैसा कोई क्यूं मुझे ऐतराज़!
रिश्ता भौतिक मद का न होता मोहताज़,
उनको समझने के होंगे सच्चे प्रयास,
मिलकर उन संग खट्टे मीठे परिहास,
उन्हें स्वत: याद किस दिन मेरे होंते उपवास!
प्रेम में असल धैर्य से बढ़ती शान,
परिवार का बढ़ता इसी से तो मान,
न लगाओ ज़्यादा अभी अनुमान,
हमें किसी बात का ज़रा भी न हैं गुमान,
पूर्वजों से विरासत में प्राप्त प्रत्येक को आत्मसम्मान,
बिना मुलाक़ात भी सुशोभित दिल का दरबार,
कुछ गानों सरीखे रिश्ते भी होते सदाबहार,
विलीन हो सकूं ऐसे रखने मुझे आयाम,
सुंगध को उनकी सहसा संभाल,
रख लूंगी उनकी हर बात का ख्याल,
सुंदर लगती फ़र्ज़ निभाने की चहल,
देखना प्रभु! कैसे कौन करता पहल,
बागी किन्तु उनका स्वभाव,
जानना हैं कैसे होते उनके हावभाव,
उनको मेरे लेखन से हल्का चाव,
उन्होंने समाज को दिए तोहफे से
भर दिए सभी के घाव!
मन का साहस सहसा बड़े,
वो लाएंगे स्नेह के सुंदर कड़े,
उम्र में माना मुझसे थोड़े बड़े,
किन्तु क्या उन्हें भी फुरसत?
की गहरी न लगे रुखसत,
लेकिन दिल मेरा ना रोके थमें,
मन में खिली नन्ही कली,
रह रह कर सौंदर्य से पली,
तीव्र खुमार से जा मिली,
सरल समझ बूंद संग संतोष करी,
मिले खाद सही सही इस दरख़्त को,
जुड़ जाए असल में जीवन में मौज़ूदा कड़ी,
बेइंतहा सा विश्वास,
कितनी कोमल सी ये आस!
- यति


