उसको मालूम जग की रीत,
उसने चुन ली अपनी प्रीत,
ज़रा थोड़ी अलग सी होगी उसकी जीत!
वक्त संग सीखी वो गुनगुनाना गंतव्य के गीत,
सपनों से बहुत प्रेम वो करती!
अपनों से वो सब कुछ कह लेती,
ना जाने तिरस्कार वो क्यूं सह लेती?
क्षमाशीलता का पाठ याद कर खुदसे कह देती,
दिल में ना पनपता उसके फरेब़,
चाहे खाली हो कुछ पल उसकी जेब!
रिश्तों को निभाने की अथक चाह,
कार्य संग न जाने कैसे बीत जाता पूरा माह,
दुपहर से हुई फिर एक शाम,
उसके जीवन में चुनौतिया हैं बड़ी आम,
जानती उसको हैं बाकी कई काम,
थोड़ा जीवन में कम उसकी आराम,
वो बदल सकती सोच जो रखता आवाम!
जीवन की परीक्षा में सदा अव्वल उसका नाम,
बीती मानो कठिन दिनों की कड़ी धूप,
कर्मठ रह निखरा उसका सुभग रूप।
- यति


