थोड़ा बिस्तर पर अंगड़ाई लेते वक़्त,
थोड़ा चाय की फुर्सत वाली चुस्की में,
कहीं गुम होने की नीयत के अतिरिक्त,
किसी फिल्म के उत्तम सीन की तरह,
आराम जो आलस को सहारा नहीं!
वो तो आलम हैं असल इरादा नहीं!
वो तो कोरे कागज़ में स्याही सरीखा हैं,
बस थोड़ा सा आराम,
थोड़ा सा चहलक़दमी में विश्राम!
बारिश को खिड़की से तकने के समान,
पत्तियों का पतझड़ में बिखरने के समान,
वक़्त को महसूस करते बिना शांति को किए बेकरार,
अपनी रोज़ की दिनचर्या में से चंद लम्हों का इकरार,
हां, बस थोड़ा सा आराम!
उलझनों को करके दरकिनार,
जड़ों से जुड़ा जैसे सुर्ख लाल चिनार,
समझते हुए भी संगत का असर,
सारे काम को सर्वश्रेष्ठ बनाने की कसर,
सारी हकीकत को करके हम स्वीकार,
होने दें परमात्मा का अद्भुत चमत्कार,
करके हौसले की भीनी सुगंध को अंतर्लीन,
आओ हो चले आराम की शोखियों में विलीन,
बस थोड़ा सा आराम,
थोड़ा सा चहलक़दमी में विश्राम!
- यति


