समर ने पूछा था आमद क्या है तुम्हारी?
सिया ने हिचकिचाकर बताया,
मामूली बचत से भी होती जुगाड़ी....
.....जवाब में वो बोला था इतनी तो मेरी
इंजीनियरिंग कैंटीन में हफ़्ते की उधारी।
अचानक उनके हाथ लगी कुछ बरसों पहले लिखी कविता :
"Letter to self"
१९.१.२००८
०५:४६
गुरुवार,
क्रमबद्ध उभरते समक्ष मेरे सारे सबक,
सम्मान से गदगद हो सृष्टि का हरेक जनक,
वेतन पर उलाहना देने वाले ओ बालक!
भूलों ना पालक हमारे संस्कारो के निर्वाहक,
वो हममें समर्पित करते मूल्यों से नज़ाकत,
हमें फिर परिश्रम करने में क्यूं भला शिकायत?
ईमान और हौसला करते जटिलता में हिफाज़त;
हमारी कार-किर्दगी हो तीव्र, बरतें हम किफायत!
काल्पनिक सुविधा से बाहर निकलना हो मुबारक,
बीते गत वर्षों में हुई मेरी दृष्टि भी अधिक सुधारक!
चाहती हूं मैं शोध, लेखन व अध्यन करूं परस्पर,
नैतिकता और नैसर्गिक मूल्यों को बढ़ाने रहूं तत्पर!
मने हरेक परिवार में मैत्री भावना का भरपूर जश्न,
स्वस्थ्य मनोरंजन से मन हो प्रफुल्लित और प्रसन्न!
अपनाया जाए सही जीवनशैली से दीर्घ आयु का वेद,
आशीर्वाद हो सदैव बड़ो का ना रहे मन में कोई खेद।
"सिया"
वर्तमान में वास्तविकता :
किस्से अनेक सिया की सहजता,समझ व संतुलन के,
सही पथ पर सदा रह करके भ्रांतियों के उन्मूलन के।
कार-कर्दगी
kaar-kardagii•کار کَرْدَگی
स्रोत: फ़ारसी
अर्थ:
दक्षता, कार्यक्षमता, काम में महारत।
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किफ़ायत
kifaayat•کِفایَت
स्रोत: अरबी
अर्थ:
कमख़र्ची,
मितव्यय।
पात्र: समर और सिया,
रचना : आमद
लेखिका, कवयित्री : यति वंदना त्रिपाठी
Hustle smart , Hustle hard!
Journey itself is the reward. :)
More Light to you.
always❤️



