घाव जो भरे नहीं,
ख़्वाब जो सहेजे नहीं,
सांस उखड़ने लगी तभी,
नाखून बदलते रंग अभी,
लम्हात मां आपके बिना अधूरे हैं!
वाक्य आपके आज भी गूंजे हैं!
आप मेरी बाहों से गई जभी!
लगा जीवन अब अगले क्षण और नहीं!
मन में था केवल यही विचार,
हो जाए बस आपके कष्ट का उपचार!
संजीवनी सरीखा चमत्कार हो जाए,
दिल को समझाती थी आप डर को हराए!
मां, संग अपने रहने का उपहार दिलाओ,
परमात्मा का परम ज्ञान मुझे बताओ,
मैं बोली थी प्रभु से , आपके प्राण बचाएं!
आपको कोई कठिनाई कभी ना सताए,
मां,आपका संबोधन मैं आज भी करती जाऊं!
लेकिन मृत्यु पर प्रश्नचिन्ह कब तक मैं लगाऊं?
फिर भी बहुत कुछ कहना रहता मुझे आपको!
शरीर में असहनीय दर्द था ना आपको?
तो फिर और तड़पने के लिए कैसे मनाऊं?
रूह को आपकी अपनी रूह में बसते हमेशा पाऊं,
आपका संग होना हमेशा महसूस करती जाऊं,
मुस्कान को आपकी सीने में धड़कता पाऊं,
आपके हौसले को रगों में दौड़ता पाऊं,
रफू भी कर लेती थी आप तो अपनी साड़ी,
आप मेरे लिए रखा कढ़ाई वाला लहंगा खुद ओढ़ी!
मुखड़े से भी सुंदर , सीरत थी आपकी सलोनी,
प्राकृतिक थी आपके गुज़र जाने की अनहोनी,
मां, अपनों की खुशी में आपकी जीत,
आनंद से सदा जगमगाती रहे ये सुंदर रीत।
- यति


