
घाव जो भरे नहीं,
ख़्वाब जो सहेजे नहीं,
सांस उखड़ने लगी तभी,
नाखून बदलते रंग अभी,
लम्हात मां आपके बिना अधूरे हैं!
वाक्य आपके आज भी गूंजे हैं!
आप मेरी बाहों से गई जभी!
लगा जीवन अब अगले क्षण और नहीं!
मन में था केवल यही विचार,
हो जाए बस आपके कष्ट का उपचार!
संजीवनी सरीखा चमत्कार हो जाए,
दिल को समझाती थी आप डर को हराए!
मां, संग अपने रहने का उपहार दिलाओ,
परमात्मा का परम ज्ञान मुझे बताओ,
मैं बोली थी प्रभु से , आपके प्राण बचाएं!
आपको कोई कठिनाई कभी ना सताए,
मां,आपका संबोधन मैं आज भी करती जाऊं!
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