दिन ढ़लने को हैं,

सूर्य अस्त होते हुए

एक संदेश दे रहा

रंग आसमां का नारंगी,

अतरंगी सी पंछियों

में गुटूर्गु अलहदा!

सामने वाली झील

में चमकता हुआ किरणों

का तमतनामा,

नाव में सवार

नाविक की सुनो व्यथा,

सफर का समाचार

समाप्त होने पर

संतुष्टि की भरके वो आंह,

बाल उनके घर में तक रहे राह,

वादा तो प्रदेय

में एक आलिंगन का,

सब्र संग सिमटे नहीं जज़्बात,

यहां सब लोग समझे हैं

हौसले से उत्पन्न अल्फ़ाज़,

मौन तो घर की गृहणी का धारण,

मंद मंद मुस्कान उसकी नहीं हैं साधारण!

शोर शहर का थमे नहीं,

घर पर नाविक को

किन्तु न शोक कोई,

छोटी सी वजह पर्याप्त अभी,

दिन ढलने को हैं,

आज का समाचार यही!


- यति