ये भाषा का उदारपन,
विचारों में नयापन,
हैं बहुत अद्वितीय,
इसी में जीवन होना हैं व्यतीत,
कुछ लोगों की आलोचना,
कुछ खुद ब खुद अपने ज़ख्म खरोंचना,
अब आदत सी बन गई,
लगता कोई ताकत सी बन गई!
किताबें बहुत सी पढ़ी,
हिम्मत रख जीवन की प्रत्येक सीढ़ी चढ़ी,
खुदके भीतर की अद्वितीय लगी जादूगरी,
मन को मंदिर मान चैतन्य करता कारीगरी।
- यति


