अभिव्यक्ति's image

साक्षात अनुभूति हुई भीतर,

कहीं कोई बात तो है !

जो निखार लाएगी,

अगर व्यक्त हो पाएगी !

बदन में कष्ट मामूली है अब,

क्यूंकि हृदय में हुंकार भरी,

उसमें मन की शक्ति आपार भरी !

उसका सर्व के लिए होगा यही उपकार,

अभिव्यक्त कर सके उसे बस यही दरोकार !

आज़ादी हैं यहां, कुछ बुझली सी,

फिर भी उन्माद तो पनपेगा !

कल टूटी थी ,

रोई थी, तड़पी थी,

आज खुदको संभाले ,

औरो को हौसला देती ,

देखो ना मां के रूप में ,

बेहद मज़बूत सी सक्षम नारी खड़ी,

चार बरस पहले की थी ये बात,

कोई लेे चला था उसके सपनों को उजाड़,

उसकी हर फरियाद,

दिया तो उसे गहन अवसाद !

उस पर फिके

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