हस कर धीरे से मुस्कुराते हुए, कहता था, "दिखता हू गरीब... हूँ नहीं !" बेखबर था लेकिन, कोई न हासिल कर पाया जो, दौलत है वो। किसी के हक़ में नहीं जो, शोहरत है वो। कभी मुकम्मल न हुई जो, इबादत है वो ।