बारिश में बहुत याद आ रहा हूँ क्या? बूंद बन कर तुम्हें भिगा रहा हूँ क्या? उसे कईं बार जाते हुए देखा है मैंने मैं बड़ी देर वहाँ पे रुका रहा हूँ क्या? कतराता हूँ जवाब देने में किसी को ताउम्र कश्मकश में फंसा रहा हूँ क्या? आग ठंडी होती ही नही सीने की मेरे मैं ही मेरे सीने को धधका रहा हूँ क्या? तेरी बदसलूकी झेलने के बाद भी तुझे मैं अपने हालात जताता रहा हूँ क्या? अब इस ज़िन्दगी से शिकवा नही रहा मैं इस ज़िन्दगी से उकता रहा हूँ क्या? बहुतों के दिलों में रह कर भी यूँ लगा मैं अब से कहीं का ना रहा हूँ क्या?