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गया है दिल से मेरे इस जहां से

गया है दिल से मेरे इस जहां से परिंदा गिर गया है आसमां से

कोई घर को लेकर जा रहा है निकलते वक़्त आख़िर उस मकां से

अक्सर रात को होता है ये कि मैं पंखा घूरता हूँ इत्मिनां से

हटी दीवार से है कोई फ़ोटो सदाएं आरही है उस निशां से

बहाना ये कि रस्ता भूल बैठा मैं खाली हाथ लौट

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