Poetry 1 min read 779.9K reads

इंतजार


ज़िंदगी तेरे खेल खेलकर थक गये हैं,अब ना जाने किसका है इन्तेज़ार हमें,ना जाने किसकी राह हम तक रहे हैं।

— काफ़िर शिव
Read more Earn more Learn more