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जगत्


क्षमा जगत् सगत , लूँगा न उत्पत्ति कदापि यहाँ , यात्रा यहाँ एक दौड़ में बदल गई माँ ने सिंग वाले बछड़े को दूध नहीं पिलाया ! क्यों माँ तो माँ थी ? !

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