बुनियाद रखी थी उस पेड़ की एक बुजुर्ग ने,

छाया घनी - मीठे फल

सोचकर जवान होगा मेरा नया कल,

अपनी पीढ़ी की बुनियाद में बुन रहा था वो कई बीज

फिर नई पीढ़ी आई नई सोच लाई

आगे बढ़ने की रफ्तार दिल में लाई


रफ्तार थी अच्छा जीने की,

लेकिन क्यो आगे बढ़ने की दौड़ में उस पेड़ को मिटा डाला,

और उसे मिटा कर अपने बुजुर्ग को भूला डाला