जिसकी साकी तुम नही,उस मैख़ाने की जाम का मजा ही क्या।जो शबाब ए हुस्न को कर पाये ना बयां,वो अल्फ़ाज़ ही क्या।
जिसकी साकी तुम नही,उस मैख़ाने की जाम का मजा ही क्या।
जो शबाब ए हुस्न को कर पाये ना बयां,वो अल्फ़ाज़ ही क्या।