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जाम ए इश्क़


जिसकी साकी तुम नही,उस मैख़ाने की जाम का मजा ही क्या।

जो शबाब ए हुस्न को कर पाये ना बयां,वो अल्फ़ाज़ ही क्या।

— Yash parmar
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