कभी ओझल होंगे रास्ते , कभी मंज़िल दूर लगेंगी फिर भी साँसों की अटूट धारा जैसे, मन को तुम ना विचलित करना उम्मीदों का दीया जलाते रहना कभी बोझिल लगेगा यह जीवन, कभी होगी चित्तचोरी सीनाजोरी अनेक विचारों की, तुम धेय्य पर नज़र टिका कर रखना उम्मीदों का दीया जलाते रहना अपने भीतर होंगे शोर बहुत, कर देंगे तुमको झकझोर बहुत, इन् सबसे ना तुम घबराते रेहना, उम्मीदों का दीया जलाते रहना कुछ साथी साथ निभाएंगे, कुछ मुश्किल में चोरते जाएंगे, किसी के आने-जाने से, तुम डगर से ना भटकते रहना, उम्मीदों का दीया जलाते रहना कभी खाली एहि मकान लगेगा, कभी घर जैसा आराम लगेगा, अपने तन-मन को तुम पत्थर सा कठोर बनाते रहना उम्मीदों का दीया जलाते रहना ना छीन सका, ना छीन सकेगा तेरा सुख-दुःख कोई, तुम अपने दुखड़े का राग सबको ना सुनाते रहना उम्मीदों का दीया जलाते रहना कभी कश्ती किनारे पर चली जाएगी तो, कभी बीच भंवर में गोते खायेगी, तुम पतवार हर हाल में चलाते रहना उम्मीदों का दीया जलाते रहना उमीदों से तुम हम, यह ऋतुएँ, यह जग संसार , देर तक अभाव इनका ना रखे रहना, क्यूंकि एक दिन सांसें थाम जानि है, कुछ ना कर पाने की व्यथा और कुछ हासिल करने की इच्छा, दोनों ही मार् जानी है देर ना अब तुम करते रहना उम्मीदों का दीया जलाते रहना/