बला-ए-इश्क़ ने आशियाने ग़र्क़-ए-दोज़ख़ किये हैं रु-बा-रु आह-ओ-फ़ुग़ाँ केकुश्तों बा शीरीं-ए-मोहब्बत में हम फिरदौसी भीआशियानी हैं उसी मकान के