वो घोल रहीं थीं चीनी अपनी उंगलियों से
न जाने कब शरबत शराब बन गई
वो बोल रहीं थीं कहानी अपनी जुबानियों से
न जाने कब कहावत किताब बन गई


वो घोल रहीं थीं चीनी अपनी उंगलियों से
न जाने कब शरबत शराब बन गई
वो बोल रहीं थीं कहानी अपनी जुबानियों से
न जाने कब कहावत किताब बन गई