आज़ाद हुए अंग्रेजों से हम,दुश्मन अब काली नियत वाले हैं,
साम्प्रदायिकता,भ्रष्टाचार के जाल जिन्होंने डाले हैं,
फंसकर इन जालों में हम खुद “हम” का भाव भुलाते हैं,
पकड धर्मं-मज़हब की बाहें, बाँट मुल्क़ को जाते हैं,
खुद के फ़र्ज़ की बात न सोचें,औरों को समझाते हैं,
हर मुद्दे पर बन बुद्धिजीवी,उंगली हमीं उठाते हैं,
और सुधार की बात जो आये,पीठ दिखाकर जाते हैं,
नयी दृष्टि अपनाकर अब,नयी सृष्टि को रचना होगा,
‘हक़’ के पलड़े के सम्मुख अब हमें ‘फ़र्ज़’ को रखना होगा
जब देशभक्त होने का तमगा,केवल सैनिक तक न सीमित होगा,
हिंद देश के हर एक छोर का वर्ग इसे अपनायेगा
सच कहती हूँ उस दिन भारत,विकसित देश कहलायेगा,
विश्वगुरु,सोने कि चिड़िया फिर से ये बन पायेगा,
और ‘मेरे’,’आपके’, 'हम सबके' प्रयास से वह दिन जल्दी ही आएगा।
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं!