✍️तबस्सुम✍️
सर कटाकर भी मैं घायल ना हुआ
काटकर भी वो मुकम्मल ना हुआ
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गिरा दिल फर्श पर जिसकी खातिर
वो इस नाजिर का तहम्मुल ना हुआ
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एक तसव्वुर सी बात ठहरी सी
रात में रात कोई गहरी सी
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बात निकली भी तो कचहरी सी
उम्र भर फैसला हासिल ना हुआ
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पत्थरों में भी फूल खिलते विनय
तू ही इस दर्जा तबस्सुम ना हुआ
#writervinayazad