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जब मुसीबत की बातें होंगी
मेरे हिस्से की भी राते होंगी
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ये जालिमों का शहर है विनय
हर एक रस्ते में एक कहर है विनय
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मोहब्बत भी यहां जहर है विनय
बड़ी मुश्किल से बरसातें होंगी
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ख्वाब आते हो चले जाते हो
आते-जाते ही नजर आते हो
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इतनी जल्दी में कहां जाते हो
चलते-चलते कहां बातें होंगी
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जरा बैठो तो सिलसिला हो विनय
ठहरिए तब तो मुलाकातें होगी
#writervinayazad