✍️प्यास (कुंआ)✍️
यार ने फिर खरीद लिया, मुझे दुआ देकर
सगा रिश्ता अभी निकला था बद्दुआ देकर
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जो मिलाता है, आंख उसकी डबडबाती है
इश्क निकला है, इन आंखों में वो धुंआ लेकर
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हम अकेले ही, नई राह को निकलते हैं
आंख मलते हैं हम, तो भी चिराग जलते हैं
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पुराने लिखिया, राहें, जिन्हें तस्दीक नहीं
वही चलते हैं, अपने साथ रहनुमा लेकर
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वो जिसको प्यास लगेगी, यहीं आएगा विनय
कहां जाते हो तुम, हाथों में यूं कुंआ लेकर
#writervinayazad

