✍️ #प्यारा ✍️
धीरे-धीरे से विनय सबको मारा जा रहा है
सांस जो ले रहा है वो दुलारा जा रहा है
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झूठ के चौखटों पर दोस्ती के झुरमुट हैं
सत्य को रंजिशों का घर पुकारा जा रहा है
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गिरे अपना भी कोई तो भी दिल को ठेस ना हो
इतने आहिस्ता से सर उतारा जा रहा है
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चौंध में पत्थरों की इतने जिगर गाफिल हैं
देखो-देखो जमीं पे इक सितारा जा रहा है
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यहां हर एक बदन पर एक से कफन हैं विनय
कैसे जानोगे कौन किसका प्यारा जा रहा है
लेखक :- विनय आजाद
#writervinayazad

