✍️मुलाकात✍️
मेरे जख्मों पे यूं मरहम की बरसात हुई
वो रो पड़े अचानक जो मुलाकात हुई
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उन्हें आंखों से शिकायत थी ये सच बोलती हैं
लो धुल गयीं ये आंखें भी वफ़ा साफ हुई
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बड़े मासूम परिंदे थे वो दोनों खुश थे
फिर अचानक आदमी से मुलाकात हुई
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जिंदगी घोंसले से उड़कर ठूंठ तक पहुंची
तरक्की मेरी भी यूं आदमी के साथ हुई
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ये अचानक मेरी आंखों को क्या हुआ है “विनय”
मेरी आंखों की मोहब्बत से मुलाकात हुई #writervinayazad

