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खुद पे अहसान करना चाहता हूं
मैं थोड़ा जल्दी मरना चाहता हूं
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मैं बहता-बहता रोज थक गया हूं
समंदर में उतरना चाहता हूं
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जिसे अपना कहूं वो रूंठता है
मैं वादों से मुकरना चाहता हूं
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सभी हसरत से पेट भर गया है
अब खुद पे जुर्म करना चाहता हूं
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मैं कायदों से ढ़ह चुका हूं विनय
खुद को गुमराह करना चाहता हूं
#writervinayazad