✍️घोंसला✍️
मकान बेशक आलीशान भी बनाया जाए
बुजुर्गो के लिए एक दालान भी बनाया जाए
धूप भी आए कहीं तो ज़रा चेहरे चमके
कहीं तो एक रोशनदान भी बनाया जाए
कूंदा खूटी कहीं तो ताक हो दीवारों में
कुछ तो इंसानियत हो यारो दस्तकारों में
कबूतर कोई या चिड़िया ही घोंसला कर ले
कोई तो हंसने चहकने का हौसला कर ले
कच्ची दीवार की मुड़ेर के छप्पर पे कहीं
तोरियों, लोकियों का जाल बिछाया जाए
नीम के पेड़ पर भी कभी तो कौआ बोले
कोई आयेगा मिलने राज हवा में खोले
कहीं तो हो हवा आने को कुछ गुंजाइश “विनय”
वो झूलता घोंसला गौरय्या का भी बनाया जाए
कहीं तो हो मोहब्बत की कुछ फुहार “विनय”
कहीं तो फिर से हिंदुस्तान बनाया जाए
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