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जिसकी हर बात खानदानी है

उसी के लहू में रवानी है

पुराने लोग कहां मिलते हैं

अब बुजुर्गों में भी जवानी है

सुबह होते ही डूब जाएगा

चंदा एक रात की कहानी है

साहब की बात का भरोसा क्या

ये तो एक ऋतु है आनी जानी है

तुम्हीं से बात शुरू कर रहा हूं

तुम्हारी दास्तां सुनानी है

हमें बेशक नया अशआर कहो

हमारी तो जुंबा पुरानी है

हमने ऐसे भी शेर देखे विनय

रोज जूतों में सिर नवानी है

#writervinayazad