बड़े बरसो बाद आज फिर तू याद आ गया, 

ये आज किस ओर से निकला है सूरज, 

कि एक बार फिर तू आज याद आ गया, 

हमने तो छोड़ दी थी उम्मीद तेरे आ जाने की, 

ये आज फिर कैसे तू इस दर आ गया, 

ये कौन सी नाउम्मीदी को तू उम्मीद देने चला आया आज फिर एक बार, 

ये आज किन राहों ने तुझे मेरी राहों में छोड़ दिया, 

क्यू मेरी दुखती पर हाथ रखता है बार-बार, 

तुझे देखे तो अब एक जमाना सा हो गया.


-लेखिका शिवानी