जब धूल भरा था आसमान में

और कराह रही थी पंछी

तब मानव तुम मिटा रहे थे

धरती मां कि हस्ती


अब क्यू तुम रोते हो

जब खो रहे हो अपनो को

क्या भूल गए वो दिन

जब तुम काट रहे थे पेड़ो को

हा धरती भी तब रोई थी

जब तुम ने अमृत जैसे पानी को

विष का घूट बना दिया

फिर अब तुम क्यू

इस काले से धुएं में रहने से डरते हो

क्या भूल गए तुम कैसे अकड़ कर

मोटर गाड़ी पर चलते हो


अब जब कमी हुई सुध हवा की

देखो कैसे घूट घूट कर मरते हो

अरे थोड़ी भी लज्जा कर लेते तो

ये घोर अंधेरा न होता

कोरोना जैसी बीमारी भी इतना बड़ा न हो पाता



अब पोंछ लो आसू तुम अपने

और भूलो जाने वाले को

अब तुमको बचाना होगा

इस स्वर्ग सा प्यारा आंगन को


मानव अब तुम खुद को पहचानो

तुम इस धरती के रक्षक हो

जो दानव भीतर बैठा है

अब उसको फेको दूर कही

अब बचाओ धरती को

मां के घाव को भरो

धरती तुमको पुकार रही है

उठो चलो आगे बढ़ो