पैसा आत्मा है इस शहर की
और बेतहाशा भागती हुई असंख्य लोगों की भीड़
इस शहर के शिराओं में
बहता हुआ लहू

कभी किसी ऊंचाई पे चढ़कर देखना
तेजी से दौड़ते हुए इस शहर को
हांफता हुआ
कितना बेचैन सा दिखाई देता है
जगमगाता हुआ
ये मिलेनियम शहर।

- फाल्गुनी राय