
टूट कर जब बिखरूँ
तो दास्तानें हो जाएं
मेरे किरदार की मशहूर
सब अदाएं हो जाएं।
आज़माइश खूब हो लेकिन
ये भी गुंजाइश हो
मालिक के दर पर
मेरी भी सिफारिश हो।
हर्फ़-दर-हर्फ़ मैं जाम लिखूँ
सुखन के मयखाने हो जाएं
जो आज साहिब-ए-मसनद हैं
कल मेरे दीवाने हो जाएं,
टूट कर जब बिखरूँ
तो दास्तानें हो जाएं
मेरे किरदार की मशहूर
सब अदाएं हो जाएं।
हाथ पे लकीरें हों सो हों
चाँद तारों की नुमाइश हो
हो तंज, कटाक्ष, तानों के जवाब
ख़्वाबों की रिहाइश हो।
पिता की हथेली पर मेरे
जुनून के मेहनताने हो जाएं
माँ के चेहरे पर
चहकती मुस्कानें हो जाएं
टूट कर जब बिखरूँ
तो दास्तानें हो जाएं
मेरे किरदार की मशहूर
सब अदाएं हो जाएं।
~ शोभित सक्सेना


